दिन चर्या मंत्र
दिन चर्या
1. प्रातः विस्तर से उठते ही इस मंत्र का उच्चारण करते हुए हाथों के दर्शन करें।
मंत्र :- कराग्रे वसते लक्ष्मीः कर मध्ये सरस्वती।
कर मूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते कर दर्शनम।
2. भूमि पर पैर रखते ही इस मंत्र को बोलते हुए भूमि की वन्दना करें।
मंत्र :- समुद्र वसने देवि पर्वत स्तन मण्डिते।
विष्णु पत्नि नमस्तुभ्यं पाद स्पर्शं क्षमस्व मे।
3. स्नान के समय पूर्व को मुख कर तीर्थों को नमस्कार करें : -
मंत्र :- ॐ पुष्कराद्यानि तीर्थानि गंगाद्या: सरिता स्तथा।
आगच्छन्तु पवित्राणि स्नान काले सदा मम।
ॐ तीर्थ राजाय नमः। ॐ वरुणाय नमः।
4. विष्णु भगवान् का स्मरण कर अपने आप को पवित्र करें।
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वा वस्थां गतो S पिवा।
यः स्मरेत् पुण्डरी काक्षं सः बाह्या भ्यन्तरः शुचिः। पुण्डरी काक्षः पुनातु।
आचमन करें :- ॐ केशवाय नमः। ॐ नरायणाय नमः।
ॐ माधवाय नमः। ॐ गोविन्दाय नमः। हाथ शुद्ध करें
5. जोत जगाने का मंत्र :- सुप्रकाशो महादीप सर्वतस्तिमिरापह।
प्रसीद मम गोविन्द दीप ज्योति नमोSस्तुते।
6. धूप का मंत्र : - वनस्पति रसोद् भूतो गन्धाढ्यो गन्ध मुत्तमम्।
आघ्रेयः सर्व देवानां धूपोSघ्रः प्रति गृह्यताम्
7. गणेश पूजा मंत्र :- (पूजा के पांच मंत्र)
अमीप्सितार्थ सिद्धयर्थं पूजितो यः सुरासुरैः।
सर्व विघ्न हरतस्मै गणाधिपतये नमः।
वक्र तुण्ड महा काय सूर्य कोटि सम प्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व कार्येषु सर्वदा। श्री गणेशाय नमः।
देवी - सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरि नारायणि नमोस्तुते। देव्यै नमः
सूर्य को गायत्री मंत्र से जल दें - ॐ भू भुर्व स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि।
धियो यो नः प्रचोदयात्।
विष्णु :- शान्ताकारं भुजग शयनं, पद्म नाभं सुरेशं, विश्वा धारं
गगन सदृशं मेघ वर्णं शुभांगम्। लक्ष्मी कान्तं कमल
नयनं योगिभि र्ध्यान गम्य वन्दे विष्णुं भवभयं हरं सर्व लोकैक नाथम्।
शिव - त्रम्बकम् यजामहे सुगन्धिं पुष्टि बर्धनं।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात्
7. कुलदेव को याद करने का मंत्र :-
कुलानां सुभदा शान्ता सर्वदा कुल वर्धनः।
आयुबलं यशो देहि कुल देव नमोस्तुते।
8. नैवेध का मंत्र : - पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति।
तदहं भक्त्युपहृतं मश्नामि प्रयतात्मनां।
कार्य की ओर जाते हुए मंत्र :-
9. शुक्लांबर धरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजं।
प्रसन्न वन्दनं ध्यायेत् सर्व विघ्नोप शान्तये।
10. कार्यारम्भ करते हुए :-
मंगलं भगवान् विष्णुः मंगलं गरुड़ ध्वज।
मंगलं पुण्डरी काक्ष मंगलायतनो हरिः।
11. कार्य समाप्ति पर मंत्र :- (छुट्टी कर दी )
ॐ पूर्ण मदः पूर्ण मिदं पूर्णात् पूर्ण मदुच्यते।
पूर्णस्य पूर्ण मादाय पूर्ण मेवाव शिष्यते।
12. सायं काल गायत्री जप करें :-
सायं काल की पूजा :- सांय काल में नाम मंत्र से पँच देवों की पूजा करें : -
ॐ गंगणपतये नमः। ॐ देव्यै नमः। ॐ सूर्याय नमः। ॐ विष्णवे नमः।
ॐ नमः शिवाय। तिलक , पुष्प, धूप, दीप, नैवेध, दूध का भोग लगा कर भगवन को सुला दें।
सुलाने का मंत्र :- ॐ विश्वेश्वरिं जगद्धात्रीं स्थिति संहार कारिणीम्।
निंद्रा भगवतीं विष्णोरतुलां तेजस प्रभु।
13. रात्रि भोज मंत्र :- अहं वैश्वानरो भूत्वा प्राणिनां देह माश्रितः। प्राणापान समायुक्तः पचाम्यन्नं चतु विर्धम्।
14. सोते समय प्रार्थना मंत्र :- जले रक्षतु वाराहः स्थले रक्षतु वामनः। अटव्यां नारसिंहश्च सर्वतः पातु केशवः।
जले रक्षतु नन्दीशः स्थले रक्षतु भैरवः। अटव्यां वीर भद्रश्च सर्वतः पातु शंकरः। अर्जुनो फाल्गुनो जिष्णु किरीटी
श्वेत वाहनः। वीभत्सु विर्जयः कृष्णः सव्य सांची धनञ्जयः।
तिस्रो भार्या कफल्लस्य दाहिनी मोहिनी सती तासां स्मरण मात्रेण चोरो गच्छति निष्फलः।
कफलकः। कफलकः। कफलकः। अगस्ति मार्धवश्चैव मुचुकुन्दो महाबलः। कपिलो मुनीरस्तीक: पचैते सुखशायिनः।
15. लम्बी यात्रा के समय :- मंगलं भगवान् विष्णुः मंगलं गरुड़ ध्वज।
मंगलं पुण्डरी काक्ष मंगलायतनो हरिः।
16. घर में बीमार हो तो मंत्र पढ़े :- राम कृपा नासहिं सब रोगा, जो एहि भान्ति बने संयोगा।
17. किसी की मृत्यु पर प्रार्थना करें :-
नमोS स्तु धर्म राजाय नमः प्रेतत्व मुक्तये।
स मे प्रीतः शुभ दद्यात् - अस्मिन् लोके परत्र च।
18. संस्कार के समय सब लोग मंत्र उच्चारण करे : -
धर्मा धर्म समायुक्तं लोभ मोह समावृतम्।
दहेयं सर्व गात्राणि दिव्यांन् लोकान् स गच्छतु।
(हे अगिन देव लोभ मोह और पाप - पुण्य से युत इस शरीर को जलाकर दिव्य लोक में पहुँचा दो।)
19. (क) गजाननं भूत गणादि सेवितं, कपित्थ जम्बू फल चारु भक्षणम्।
उमा सुतं शोक विनाश कारकं नमामि विघ्नेश्वर पाद पङ्कजम्। श्री गणेशाय नमः।
(ख) देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद, प्रसीद मातर जगतोखिलस्य।
प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं, त्वमीश्वरी देवी चरा चरस्य।
(ग ) नमोSस्तु अनन्ताय सहस्र मूर्तये सहस्र पादाक्षि शिरोरुबाहवे।
सहस्र नाम्ने पुरुषाय शाश्वते सहस्र कोटि युग धारिणे नमः।
(घ) कर्पूर गौरं करुणावतारं, संसार सारं भुजगेन्द्र हारं
सदा बसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानी सहितं नमामि।
( ड़) त्वमेव माता च पिता त्वमेव , त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।
त्वमेव विद्याच द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देव देव।
20. ॐ कारं बिन्दुंसयुक्तं नित्यं ध्यायन्ति योगिनः कामदं मोक्षदं चैव ॐ काराय नमो नमः
1. प्रातः विस्तर से उठते ही इस मंत्र का उच्चारण करते हुए हाथों के दर्शन करें।
मंत्र :- कराग्रे वसते लक्ष्मीः कर मध्ये सरस्वती।
कर मूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते कर दर्शनम।
2. भूमि पर पैर रखते ही इस मंत्र को बोलते हुए भूमि की वन्दना करें।
मंत्र :- समुद्र वसने देवि पर्वत स्तन मण्डिते।
विष्णु पत्नि नमस्तुभ्यं पाद स्पर्शं क्षमस्व मे।
3. स्नान के समय पूर्व को मुख कर तीर्थों को नमस्कार करें : -
मंत्र :- ॐ पुष्कराद्यानि तीर्थानि गंगाद्या: सरिता स्तथा।
आगच्छन्तु पवित्राणि स्नान काले सदा मम।
ॐ तीर्थ राजाय नमः। ॐ वरुणाय नमः।
4. विष्णु भगवान् का स्मरण कर अपने आप को पवित्र करें।
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वा वस्थां गतो S पिवा।
यः स्मरेत् पुण्डरी काक्षं सः बाह्या भ्यन्तरः शुचिः। पुण्डरी काक्षः पुनातु।
आचमन करें :- ॐ केशवाय नमः। ॐ नरायणाय नमः।
ॐ माधवाय नमः। ॐ गोविन्दाय नमः। हाथ शुद्ध करें
5. जोत जगाने का मंत्र :- सुप्रकाशो महादीप सर्वतस्तिमिरापह।
प्रसीद मम गोविन्द दीप ज्योति नमोSस्तुते।
6. धूप का मंत्र : - वनस्पति रसोद् भूतो गन्धाढ्यो गन्ध मुत्तमम्।
आघ्रेयः सर्व देवानां धूपोSघ्रः प्रति गृह्यताम्
7. गणेश पूजा मंत्र :- (पूजा के पांच मंत्र)
अमीप्सितार्थ सिद्धयर्थं पूजितो यः सुरासुरैः।
सर्व विघ्न हरतस्मै गणाधिपतये नमः।
वक्र तुण्ड महा काय सूर्य कोटि सम प्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व कार्येषु सर्वदा। श्री गणेशाय नमः।
देवी - सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरि नारायणि नमोस्तुते। देव्यै नमः
सूर्य को गायत्री मंत्र से जल दें - ॐ भू भुर्व स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि।
धियो यो नः प्रचोदयात्।
विष्णु :- शान्ताकारं भुजग शयनं, पद्म नाभं सुरेशं, विश्वा धारं
गगन सदृशं मेघ वर्णं शुभांगम्। लक्ष्मी कान्तं कमल
नयनं योगिभि र्ध्यान गम्य वन्दे विष्णुं भवभयं हरं सर्व लोकैक नाथम्।
शिव - त्रम्बकम् यजामहे सुगन्धिं पुष्टि बर्धनं।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात्
7. कुलदेव को याद करने का मंत्र :-
कुलानां सुभदा शान्ता सर्वदा कुल वर्धनः।
आयुबलं यशो देहि कुल देव नमोस्तुते।
8. नैवेध का मंत्र : - पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति।
तदहं भक्त्युपहृतं मश्नामि प्रयतात्मनां।
कार्य की ओर जाते हुए मंत्र :-
9. शुक्लांबर धरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजं।
प्रसन्न वन्दनं ध्यायेत् सर्व विघ्नोप शान्तये।
10. कार्यारम्भ करते हुए :-
मंगलं भगवान् विष्णुः मंगलं गरुड़ ध्वज।
मंगलं पुण्डरी काक्ष मंगलायतनो हरिः।
11. कार्य समाप्ति पर मंत्र :- (छुट्टी कर दी )
ॐ पूर्ण मदः पूर्ण मिदं पूर्णात् पूर्ण मदुच्यते।
पूर्णस्य पूर्ण मादाय पूर्ण मेवाव शिष्यते।
12. सायं काल गायत्री जप करें :-
सायं काल की पूजा :- सांय काल में नाम मंत्र से पँच देवों की पूजा करें : -
ॐ गंगणपतये नमः। ॐ देव्यै नमः। ॐ सूर्याय नमः। ॐ विष्णवे नमः।
ॐ नमः शिवाय। तिलक , पुष्प, धूप, दीप, नैवेध, दूध का भोग लगा कर भगवन को सुला दें।
सुलाने का मंत्र :- ॐ विश्वेश्वरिं जगद्धात्रीं स्थिति संहार कारिणीम्।
निंद्रा भगवतीं विष्णोरतुलां तेजस प्रभु।
13. रात्रि भोज मंत्र :- अहं वैश्वानरो भूत्वा प्राणिनां देह माश्रितः। प्राणापान समायुक्तः पचाम्यन्नं चतु विर्धम्।
14. सोते समय प्रार्थना मंत्र :- जले रक्षतु वाराहः स्थले रक्षतु वामनः। अटव्यां नारसिंहश्च सर्वतः पातु केशवः।
जले रक्षतु नन्दीशः स्थले रक्षतु भैरवः। अटव्यां वीर भद्रश्च सर्वतः पातु शंकरः। अर्जुनो फाल्गुनो जिष्णु किरीटी
श्वेत वाहनः। वीभत्सु विर्जयः कृष्णः सव्य सांची धनञ्जयः।
तिस्रो भार्या कफल्लस्य दाहिनी मोहिनी सती तासां स्मरण मात्रेण चोरो गच्छति निष्फलः।
कफलकः। कफलकः। कफलकः। अगस्ति मार्धवश्चैव मुचुकुन्दो महाबलः। कपिलो मुनीरस्तीक: पचैते सुखशायिनः।
15. लम्बी यात्रा के समय :- मंगलं भगवान् विष्णुः मंगलं गरुड़ ध्वज।
मंगलं पुण्डरी काक्ष मंगलायतनो हरिः।
16. घर में बीमार हो तो मंत्र पढ़े :- राम कृपा नासहिं सब रोगा, जो एहि भान्ति बने संयोगा।
17. किसी की मृत्यु पर प्रार्थना करें :-
नमोS स्तु धर्म राजाय नमः प्रेतत्व मुक्तये।
स मे प्रीतः शुभ दद्यात् - अस्मिन् लोके परत्र च।
18. संस्कार के समय सब लोग मंत्र उच्चारण करे : -
धर्मा धर्म समायुक्तं लोभ मोह समावृतम्।
दहेयं सर्व गात्राणि दिव्यांन् लोकान् स गच्छतु।
(हे अगिन देव लोभ मोह और पाप - पुण्य से युत इस शरीर को जलाकर दिव्य लोक में पहुँचा दो।)
19. (क) गजाननं भूत गणादि सेवितं, कपित्थ जम्बू फल चारु भक्षणम्।
उमा सुतं शोक विनाश कारकं नमामि विघ्नेश्वर पाद पङ्कजम्। श्री गणेशाय नमः।
(ख) देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद, प्रसीद मातर जगतोखिलस्य।
प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं, त्वमीश्वरी देवी चरा चरस्य।
(ग ) नमोSस्तु अनन्ताय सहस्र मूर्तये सहस्र पादाक्षि शिरोरुबाहवे।
सहस्र नाम्ने पुरुषाय शाश्वते सहस्र कोटि युग धारिणे नमः।
(घ) कर्पूर गौरं करुणावतारं, संसार सारं भुजगेन्द्र हारं
सदा बसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानी सहितं नमामि।
( ड़) त्वमेव माता च पिता त्वमेव , त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।
त्वमेव विद्याच द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देव देव।
20. ॐ कारं बिन्दुंसयुक्तं नित्यं ध्यायन्ति योगिनः कामदं मोक्षदं चैव ॐ काराय नमो नमः
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