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कहानी तारा रानी की Tara Rani Story Read Must

काँप गयी तारा ये देखकर माँ की टेर लगाती है। आकर लाज बचाओ मैया सच्ची शेरावाली है। फिर गुस्से से आ राजा ने सिर से साड़ी खिचाई है। झट प्रचण्ड हो माता ने फिर अपनी कला दिखाई है। खून तो केसर, रोली बन गया, हड्डी फूल मखाने के। बाकी बन गये लौंग छुआरे और इलायची दाने के। जब देखा राजा ने तो विश्वास नहीं फिर आया आज देख तू तारा रानी हम जगराता कराएँगे। नीला घोडा काट के अपना माँ को भोग लगाएंगे। भेज के दल फौरन राजा ने संगत को बुलवाया है। फिर महलो के बिच भवन खुद अपने हाथो से सजाया है। तारा बहुत उदास हो गई माँ का ध्यान लगाती है। दासी विनती सुन मैया और फिर शीश झुकाती है। प्रवेश कर गई झट तारा में अपनी कला दिखाई है। हरिशचन्द्र राजा से बोली जो तुम आजमाना चाहते हो। बेजुबान घोड़े को राजा तुम क्यों बलि चढ़ाते हो। टुकड़े कर तू अपने पुत्र के देखे दुनिया सारी जो। मैया को आजमाना चाहे कर ले झट तैयारी को। जिद्दी राजा कुछ नहीं समझा क्रोध में आया है। अपने पुत्र को झट महलों से दे आवाज़ बुलाया है धड़ से सिर को अलग कर दिया टुकड़े टुकड़े करवाया है। तारा भोग बनाकर लाओ और यह हुकम सुनाया है। विनती करती माँ ...