Shiksha wedding

दो अलग अलग लोग जब शादी के पवित्र बन्धन में जुड़ते है, खुशियां के पक्षी तब सपनो के आसमान में उड़ते है।
हवा में सांज,  गीतों में राग होता है। शिक्षा में आप मेरी गल्ती पर ध्यान मत देना क्योकि चमकते चाँद में भी दाग होता है।
स्वर्गीय श्री सुबाष चन्द्र के घर लान्सी में 1998   8 फरबरी को बहुत मिननतों बाद आई एक नन्ही परी जिसका नाम प्यार से कविता रखा, जो आज अंकुश जी के साथ एक नए बन्धन में बन्धने जा रही है।

अपनी बहन के नए सफर में उनकी छोटी बहन प्रीती उनसे कुछ कहना चाहती है। सोच रही हूँ, ऐसे मौके पर बहन को क्या उपहार दूँ। अचानक मन में आया क्यों न शिक्षा का उपहार दूँ।

सुना - सुना हुआ घर, सुनी - सुनी हुई गली,
लाड प्यार से पाली बहना, आज बाबुल का घर छोड़ चली।

 माली ने पूछा मालिन से फूलों पर यौवन क्यों छाया है। कहा
मालिन ने माली से खा आज दो घरों के मिलान का समय आया है।
गिने जाते है दिन  लिए वो रात आज आ पहुँची है।

कहते है दादा - दादी अपनी लाड़ली को दुआएं देते है,
फूलों -फलो सदा खुश रहो यही आशीर्वाद देते है।
जिस माँ ने जन्म दिया, उस माँ से जुड़ा तुम हो जाओगी। 
जब डोली तुम्हारी जाएगी तब सबसे ज्यादा तुम्हारी माँ आँसु बहाएगी।

कहे भाई रो रो के बहना अपना फ़र्ज़ निभाऊंगी।
इन्तज़ार करना तुम राखी बँधवाने जरूर आऊंगा।
दुनिया का दसतूर यही है भाई बहन साथ नहीं जाते है।
कहते है बहना कसम तुम्हारी हम न अकेले रह पाते है।

कहते है दीदी जीजा कविता तुम हो खुशियों की चाबी,
कहते है मामा मामी, चाचा - चाची ओ बेटी घर बदले,
रिश्ते बदले बदलेगी अब दुनिया तेरी।

सांस - ससुर की सेवा करना अनेक चरणों में शीश झुकाना,
तुम ससुर को पिता समझना उनका आदर करना, तुम कम बोलना, मीठा बोलना
मर्यादा में रहना तुम। नन्द अपनी से खुशियो से प्यार बढ़ाना।  तुम अब यह बाते तुम्हारे हाथों में।
ससुराल को स्वर्ग बनाना तुम।

यह है इच्छा  भगवान से अटल सुहैल रहे।
बानी रहे यह जोड़ी सदा जब तक धरती आकाश रहे।

कविता पली  है बड़े लाड प्यार से यह दो नादान है महान है, आप सब रखना उसका ध्यान रखना सेहरे वाले जीजा जी सुन लो मेरी पुकार मेरी बहना को ऐसे रखना जैसे गले का  हार,सुनिए - सुनिए जीजा जी आपसे है कुछ कहना उमर कैद अब हो गई है। अब कैदी रहना।  अगर कोई गलती हो जाये मेरी बहना से तो प्यार से समझाना सिसुकिया भर कर रोए तो गले से इसे लगाना। चूड़ियां हाथ में खनकती है, तो आती है आवाज़, शिक्षा खत्म करती हूँ गलती करना माफ़। 

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